तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
उन्होंने कहा कि बिहार रेजिमेंट ने आधुनिक उपकरणों के सहारे राहत और बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
कोलकाता। तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने की घटना को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की कथित लापरवाही और अनियमितताओं के कारण शहर को “मृत्युपुरी” में बदल दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
विधानसभा में गुरुवार को मुख्यमंत्री ने कहा कि तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने से नौ लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को घटना की तथ्य-जांच रिपोर्ट मिल चुकी है और अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कोलकाता नगर निगम ने इस वर्ष 17 जनवरी को गोदाम के भवन निर्माण योजना को मंजूरी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मंजूरी प्रक्रिया में नगर निगम के अभियंता, सहायक अभियंता और कार्यकारी अभियंता की भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भवन योजना से जुड़े दस्तावेजों पर नगर निगम के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में संबंधित दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि अवैध निर्माण और निर्माण संबंधी अनियमितताओं के मामलों में राज्य सरकार किसी को भी रियायत नहीं देगी। उन्होंने कहा कि नया कानून लाया जा रहा है, जिसके तहत दोषियों की संपत्ति जब्त करने और उन्हें जेल भेजने का प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ राज्य सरकार शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएगी। इसके तहत राजारहाट-न्यू टाउन, विष्णुपुर ग्रामीण क्षेत्र, सोनारपुर, बारुईपुर, महेशतला, बजबज और कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में सभी भवन निर्माण योजनाओं का लेखा-परीक्षण कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस प्रक्रिया के कारण इन क्षेत्रों में चार सप्ताह तक सभी निर्माण कार्य बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि भवन योजनाओं की जांच के बाद ही आगे निर्माण कार्य की अनुमति दी जाएगी।
तारातला हादसे को पूर्ववर्ती सरकार के “पाप का परिणाम” बताते हुए मुख्यमंत्री ने बचाव व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में बचाव कार्य के लिए उपयोग होने वाले उपकरणों को आधुनिक नहीं बनाया गया। इसके कारण मलबे में फंसे लोगों को निकालने में बचाव दलों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भारी लोहे के बीम काटने वाली आधुनिक मशीनें और पेशेवर बचाव दल उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और सेना की सहायता लेने की व्यवस्था को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बिहार रेजिमेंट ने आधुनिक उपकरणों के सहारे राहत और बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।